गोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग

गोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग।
मोहन मुरली बजावैं गावें गोरी राग ॥१॥
नर नारी एकत्र व्है आये नंद दरबार।
साजे झालर किन्नरी आवज डफ कठतार ॥२॥
चोवा चन्दन अरगजा और कस्तूरी मिलाय।
बाल गोविन्द को छिरकत सोभा बरनी न जाय॥३॥
बूका बंदन कुमकुमा ग्वालन लिये अनेक।
युवती यूथ पर डारही अपने-अपने टेक॥४॥
सुर कौतुक जो थकित भये थकि रहे सूरज चंद।
’कृष्णदास’ प्रभु विहरत गिरिधर आनन्द कंद॥५॥

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