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ठाडे कुंज द्वार, पीय प्यारी,

ठाडे कुंज द्वार,  पीय प्यारी, करत परस्पर,  ह्सहस बतियां ।

रंगीली तीज गनगोर, भोर सज आंई, घरघर तें, सब सखियां ॥ १ ॥

करत आरती अति रसमाती, गावत गीत, निरख मुख अखियां ।

कृष्णदास प्रभु चतुर  नागरी,   कहा बरनों नांहीं,  मेरी गतियां ॥ २ ॥

आज नन्दलाल मुखचंद नयनन निरख

आज नन्दलाल मुखचंद नयनन निरख, परम मंगल  भयो,  भवन मेरे |
कोटि   कंदर्प   लावण्य   एकत्र   कर,   वारु   तब    ही  जब,   नेक  हेरे || १||
सकल सुख सदन हरषित वदन गोपवन, प्रबलदल  मदनदल, संग घेरे |
कहो कोऊ कैसेंहूँ   नहीं  सुधबुध  बने,   गदाधर   मिश्र,  गिरिधरन  टेरें || २ ||

आज नंदलाल मुख चंद नयनन निरख

आज नंदलाल मुख चंद नयनन निरख परम मंगल भयो भवन मेरे ॥
कोटि कंदर्प लावण्य एकत्र कर वारूं तबही जब नेक हेरे ॥१॥
सकल सुख सदन हरखित वदन गोपवर प्रबल दल मदन संग घेरें ॥
कहो कोऊ केसेंहू नहिं सुधबुध बने गदाधर मिश्र गिरिधरन टेरें ॥ २॥

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