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आवो पियरवा सुरिजन मितवा...

आवो    पियरवा    सुरिजन    मितवा,    रंगभर   मोरे   घर   आवो ।
एक ले आई गुलाल साजन, सुरिजन होरी खेले, मोह रही ब्रजबाला ।। १  ।।
बाजत       ताल,    मृदंग   अधोटी,   बिना   बेन   रसाल ।
कृष्णजीवन    प्रभु    होरी   खेले,   होरी के   दिन   चार ।। २  ।।

चलो सखी मिल, देखन जैये

चलो   सखी  मिल,   देखन   जैये,   नंद के   लाल   मचाई   होरी ।
अबीर गुलाल, कुमकुमा केसर, पिचकारिन भरि, भरि ली दौ..री ।। १ ।।
एकजु   पिय को,   चोरा   चोरी,   हमें   लखैं   नहीं   कोरी ।
कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु कौं, भरि हौं राधा  गौ..री ।। २ ।।

रँगन रंग हो हो होरी है

रँगन  रंग हो हो होरी है,   कोऊ   भलौ  बुरौ जिनि  मानौ ।
मनमोहन के मन मोहन  कौं,   श्री  वृषभानु  किशोरी  है ।। १ ।।

होरी  में  कहा कहा नहीं कहियत यामैं कहा कुछ चोरी है ।
कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु सौं, जो कहियै सो थोरी है ।। २ ।।

रसिया को नार बनावो रे रसिया को

रसिया को नार बनावो रे रसिया को.. रसिया को नार बनावो रे रसिया को..रसिया को नार बनावो रे रसिया को

कटी   लहेंगा   गरेमाल   कंचुकी,   वाको   चुनरी   शीश उठावो री  ।। १ ।। रसिया को...
बांहसरा  बाजुबंध सोहे, हांरे रसिया (४) वाको नक्वेसर  पहेरावो री ।। २ ।। रसिया को
गाल   गुलाल दृगन बिच काजर,  वाको     बेंदी   भाल   लगावो री ।। ३ ।। रसिया को
आरसी छल्ला और संग वारि, हांरे रसिया (४)
                                               वाको अनवट बिछुवा पहेरावो री ।। ४ ।। रसिया को
कृष्ण जीवन तारी बजाय के, वाको जसुमति   निकट   नचावो री  ।। ५ ।। रसिया को

खेलन खेलन आये हरि नंदगाम ते रंगभीने बरसानें

खेलन खेलन आये हरि   नंदगाम  ते   रंगभीने   बरसानें ।
मृगमद   भेद   अरगजा   चोवा,   सब   नारी   नर   साने ।। १ ।।

दृग ढिंग छांड  मांड  केसरमुख   रिम्कत   सुख  सरसाने ।
बिन   कारज   कारज   कर  राखे   शोभित चख अरसाने ।। २ ।।

सोई  अंजन  विष  ईषद   लोचन    चढ़े   मदन   खरसाने ।
कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु कौं रिम्की भरति अंक्बारी ।। ३ ।।

सुन री सखी तेरो दोष नही,मेरो पिय रसिया री

सुन री सखी तेरो दोष नही,मेरो पिय रसिया री ।
नवल लाल को सबक कोहू चाहत, कौन कौन के मन बसिया री ॥
एकन सो नयना जोरें एकन सों द्रोह मरोरें,एकन सों मुख हँसिया री ।
कृष्णजीवन लखीराम के प्रभु माई संग जोरत पूरन रखिया री ॥

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