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बोलवेकी नाहीं, तुमसो बोलवेकी नाहीं

बोलवेकी नाहीं, तुमसो बोलवेकी नाहीं।
घर घर गमन करत सुंदरपिय,
चित्त नाही एक ठाहीं॥१॥

कहा कहो शामल घन तुमसो,
समज देख मन माहीं।
सूरदास प्रभु प्यारीके वचन सुन,
ह्रदय मांझ मुस्कानी॥२॥

कब देखो मेरी और, नागर नन्दकिशोर

कब देखो मेरी और, नागर नन्दकिशोर, बीनती करत भयो भोर।
हम चितवत तुम चितवत नाही, मेरे कर्म कठोर॥१॥

जनम जनम की दासी तिहारी, तापर इतनो जोर।
सूरदासप्रभु तुम्हारे रोम पर, वारो कंचन खोर॥२॥

जागत रैंन गई, पिया बिन जागत रैंन गई

जागत रैंन गई, पिया बिन जागत रैंन गई।
अवधि वदी गए, अजहू न आये, बड़ी बेर भयीं॥१॥

कछु कहत हो, करत कछु और, कौन सीख दई।
सांच नही तेरो एको अंग, कहाँजू रीत लई॥२॥

कैसे कीजे विश्वास, भये हो विषई।
रसिक प्रीतम रावरी, छीन छीन गती नई॥३॥

कब देखो मेरी ओर

कब देखो मेरी ओर
नागर   नंदकिशोर  बिनती   करत   भयो    भोर |
हम चितवत तुम चितवत नाहीं मेरे करम कठोर || १  ||
जन्म जन्म की दासी तिहारी  तापर  इतनो  जोर |
सूरदास प्रभु तुम्हारे  रोम पर  वारों   कंचन  खोर || २  ||

कमलसी अखियाँ लाल तिहारी

कमलसी अखियाँ लाल तिहारी |
तिनसों तकतक  तीर चलावत वेधत छतियां हमारी || १  ||
इन्हें कहा कोऊ दोष लगावत   ये  अजहूँ   न   संभारी |
श्री विठ्ठल गिरिधारी कृपानिधि सूरत ही ते सुखकारी || २  ||

कहाँजू बसे सारी रात नंदसुत

कहाँजू बसे सारी रात नंदसुत  |
चार पहर मोहि चार  युग  बीते   तुम जो आये परभात  || १  ||
लटपटी पाग नींदभरी  अखियाँ काजर लाग्यो तेरे गात |
चोली के बंद चुभ रहे तनमें   कसन   भयो   सब   गात || २  ||
रहो   रहो    वृषभान   नंदिनी    सुन है   यशोदा    मात |
सूरदास प्रभु तिहारे  मिलन कों रजनी कल्प सम जात || ३  ||

१५ - वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे

वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे ।
एहि रसनातें भजो नामरस अमृत भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥
भानु तनया दया अति ही करुणामया इनहीं की कर आस अब सदाई जीजे ।
चतुर्भुजदास कहे सोई प्रभु पास रहे जोइ श्री यमुनाजी के रस जु भीजे ॥२॥

Barambaar Shri Yamune gun ghaan kije. 
Yehi rasnate bhajo naam ras amrit, bhagya jaake hain sohiju pije.
Bhanutnaya daya atihi karunamaya, inki kar aas ab sadahi jije,
Chaturbhujdas kahe sohi piya paas rahe, joi ShriYamunaji ke ras ju bhije.

१६ - हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे

हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे ।
जहाँ निसवासर रास में रसिकवर, कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥
थकित सरिता नीर थकित ब्रजबधू भीर, कोउ न धरत धीर मुरली सुनीजे ।
चतुर्भुजदास यमुने पंकज जानि, मधुप की नामी चित्त लाय गुंजे ॥२॥

Het kari det ShriYamune vas kunje.
Jahan nis vasar rasmein rasikvar, kahan lo barniye prem punje.
Thakit sarita neer, thakit Brij badu bhir, koi na dharat dhir murli sunije,
Chaturbhujdas Yamune pankaj jani, madhupki ki nai chit lai gunje.

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