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राधे तेरे भवन हों आऊं

राधे तेरे भवन हों आऊं ।
सादर कहत सांवरो  मोहन  नेंक   दूध   जो  पाऊं ।। १ ।।
मात पिता हूँ विलगु न माने  ओर  यह भेद न जाने ।
जो तू सोंह   करे   बाबा  की   तो  मेरे   मनमाने ।। २ ।।
सब  दिन  खेलो   मेरे  आंगन अपने नेन सिराऊं ।
परमानंद प्रभु विनती  किनी   अपने मित्र बुलाऊँ ।। ३ ।।

लाल नेक देखियें भवन हमारो

लाल नेक देखियें भवन हमारो ।
द्वितीयापाट सिंहासन बैठे अविचल राज  तिहारो ।। १ ।।
सास हमारी खरिक सिधारी पीय वन गयो सवारो ।
आसपास घर कोऊ  नाहीं   यह  एकांत  हे  न्यारो ।। २ ।।
ओट्यो दूध सद्य  धौरीको  लेहु  श्याम  घन पीजे ।
परमानंददास  को ठाकुर कछु कह्यो हमारो कीजे ।। ३ ।।

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