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में नहीं जान्यो माई बहु नायक को नेह

(ज्येष्ठ वदी 1 से आषाढ़ सुदी 1 तक गया जाता है)

में नहीं जान्यो माई  बहु नायक को  नेह ।
मास अषाढ़की  घटा  घुमड़ आई रिमिझिमी बरखत मेह  ।। 1 ।।
काहू त्रियन संग नेह जोर के काहू के आवत प्रात उठ गेह  ।
घोंघी के प्रभु रसबस  कर  लीने  बडभागिन  जुवती  एह  ।। 2 ।।

हों नीके जानतरी आली

(ज्येष्ठ वदि  1 से आषाढ़ सुदी 1 तक गाया  जाता है)

हों नीके जानतरी आली, बहुनायक को नेह ।
कहुं  धूप  कहुं   छांह    जनावत,   कहुं  बादल   कहुं   मेह ।। 1 ।।
वृँदावन   विहरत   गोपीन   संग,   कोऊ  न   जानत   भेह ।
'तानसेन' के प्रभु तुम बहु नायक, छिन आँगन  छिन  गेह ।। 2 ।।

३० - भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे

भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे ।
अपने रस रंग मे संग राखत सदा,सर्वदा जोइ श्री यमुने नाम उच्चारे ॥१॥
इनकी कृपा अब कहाँ लग बरनिये, जैसे राखत जननी पुत्र बारे ।
श्री विट्ठल गिरिधरन संग विहरत, भक्त को एक छन ना बिसारे ॥२॥

Bhakt pratipaal janjaal taare.
Apne ras rang mein sang rakhat sada, sarvada joi ShriYamune naam uchaare.
Inki kripa aab kahan lag varniye, jaise rakhat janani putra vaare,
Shri Vithal Giridharan sadhak viharat, bhakt ko ek chin na bisare.

२९ - रास रससागर श्री यमुने जु जानी ।

रास रससागर श्री यमुने जु जानी ।
बहत धारा तन प्रतिछन नूतन, राखत अपने उर मां जु ठानी ॥१॥
भक्त को सहि भार हेतु जो प्रान आधार, अति हि बोलत मधुर मधुर बानी ।
श्री विट्ठल गिरिधरन बस किये, कौन पें जात महिमा बखानी ॥२॥


Raas rassagar ShriYamune ju jaani.
Bahat dhara tan pratichin nutan, rakhat apne urmanju thani.
Bhakt ko sahe baar, dhet ju pranaadhar, atihi bolat madhur madhur baani.
Shri Vithal Giridharanvar bas kiye, kaun pe jaat mahima bakhani.

३२ - श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी

श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी ।
इनके स्वरूप को सदा चिन्तन करतम कल न परत जाय नेह लागी ॥१॥
पुष्टि मारग धरम अति दुर्लभ करम छोड सगरे परम प्रेम पागी।
श्री विट्ठल गिरिधरन ऐसी निधि, भक्त को देत है बिना माँगी ॥२॥


ShriYamune ke naam le soi suhaagi.
Inke svarup ko sada chintan karat, kal na parat jaye leha laagi.
Pushtimarg maram atihi durlab karam, chhaad sagre param prempaagi,
ShriVithal Giridharan aisi nidhi, bhaktko det hain  bina maangi.

३१ - कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी

कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी ।
सबही को मन मोहत मोहत मोहन , सो पिया को मन है जु हरनी ॥१॥
इन बिना एक छिन रहत नही जीवन धन, ब्रज चन्द मन आनन्द करनी ।
श्री विट्ठल गिरिधरन संग आये, भक्त के हेत अवतार धरनी ॥२॥

Kaun pe jaat ShriYamune jo barni.
Sabhi ko man mohat mohan, so Piya ko man hai ju harni.
In bina ek chan rahat nahi jeevan dhan, brujchand man anand karni,
Shri Vithal Giridharan sang aay, bhaktke het avtaar dharni.

३५ - श्री यमुने तुमसी एक हो जु तुमहीं

श्री यमुने तुमसी एक हो जु तुमहीं ।
करि कृपा दरस निसवासर दीजिये, तिहारे गुनगान को रहत उद्यम ही ॥१॥
तिहारे पाये ते सकल निधि पावहीं, चरण्कमल चित्त भ्रमर भ्रमहीं ।
कृष्णदासनि कहें कौन यह तप कियो, तिहारे ढंग रहत है लता द्रुम ही ॥२॥


ShriYamune tumsi ek ho jo tumhi. 
Kari kripa daras nisvasar dijiye, tihare guungaan ko rahe uddhyam hi.
Tihare payete sakal nidhi paavhi, charan kamal chit bramar bram hi,
Krishnadasni kahe kaun yeh tap kiyo, tihare ding rahat hain lata dhrumhi.

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