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हिंडोरे माई झूले गिरिधरलाल

हिंडोरे माई झूले गिरिधरलाल ।
संग झूलत वृषभान नंदिनी, बोलत वचन रसाल ।। 1 ।।

पिय शिर पाग कसुंभी शोभित, तिलक बिराजत भाल ।
प्यारी पहेरें कसुंभी चोली, चंचल नयन विशाल ।। 2 ।।

ताल मृदंग बाजे बहु बाजत, आनंद उर न समात ।
श्री वल्लभ पदरज प्रतापतें, निरख रसिक बल जात ।। 3 ।

श्री वल्लभ लाल पालने झूलें मात एलम्मा झुलावे हों

श्री वल्लभ लाल पालने झूलें मात एलम्मा झुलावे हों।
रतन जटित कंचन पलना पर झूमक मोती सुहावे हो॥१॥
झालर गज मोतिन की राजत दच्छिन चीर उढावे हो।
तोरन घुंघरु घमक रहे हैं झुंझना झमकि मिलावे हो॥२॥
चुचकारत चुटकी दै नचावत चुंबन दै हुलरावे हो।
किलकि किलकि हँसत मुख प्रमुदित बाललीला जाहि भावे हो॥३॥
कबहुँ उरज पय पान करावत फिर पलना पोढावे हो।
पीठ उठाय मैया सन्मुख व्है आपुन रीझि रिझावे हो॥४॥
महाभाग्य हैं तात मात दोऊ आपुन यों बिसरावै हो।
वल्लभदास आस सब पूजी श्री वल्लभ दरस दिखावे हो॥५॥

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