Showing posts with label श्री गुंसाइजी प्रभुचरण. Show all posts
Showing posts with label श्री गुंसाइजी प्रभुचरण. Show all posts

मंगल मंगलम ब्रज भुवि मंगलम

मंगल मंगलम ब्रज भुवि मंगलम |
मंगलमिंहश्री नंद यसोदा, नाम सुकीर्तनमेत तद रूचिरोत्संग, सुलालित पालित रूपम ||१ ||
श्री श्री कृष्ण इति श्रुति सारम,  नाम   स्वार्त   जनाशय   तापपह  मिति  मंगल  रावम |
ब्रज  सुंदरी   वयस्य  सुरभि  वृन्द  मृगीगण     निरुपमभावा   मंगल   सिन्धु   चयाय || २ ||
मंगलमिषतस्मितयुतमीक्षण   भाषणमुन्नत   नासापुटगत     मुक्ताफल     चलनम |
कोमल  चलदम   गुलिदल   संयुत  वेणु   निनाद     विमोहित   वृन्दावनभुवि   जाता || ३ ||
मंगलमखिलम   गोपी   शितुरति   मंथरगति   विभ्रममोहित   रासस्थित        गानम |
त्वं   जय    सततं   श्री गोवर्धनधरपालय     निज       दासानम || ४ ||

श्री गुंसाईजीनुं धोळ

श्री गुंसाईजीनुं  धोळ

श्री गुंसाईजीने  जाणोंजी, एह्नां स्वरुपने वखाणोजी, श्री गुंसाईजीने  जाणोंजी.
चलती    जै जै श्री विठ्ठलेश जै जै श्री विठ्ठलेश जलेबीनो उत्सव जै जै श्री विठ्ठलेश            
             जलेबी आरोगे श्रीजी जै जै श्री विठ्ठलेश क्लेश ना रहे लेश  जै जै श्री विठ्ठलेश  
             श्री विठ्ठलेशने  हुं   नमन करूँ  | कृपासिंधुने हुं   नमन करूँ |
             भक्त वत्सलने हुं नमन करूँ  |  अति सुन्दरने  हुं नमन करूँ  |

चलती    जै जै श्री विठ्ठलेश जै जै श्री विठ्ठलेश जलेबीनो उत्सव जै जै श्री विठ्ठलेश            
             जलेबी आरोगे श्रीजी जै जै श्री विठ्ठलेश क्लेश ना रहे लेश जै जै श्री विठ्ठलेश || १  ||
             कृष्णलीलाना रसिकने हुं  नमन करूँ | श्री पति प्रभुने हुं नमन करूँ |
             श्री वल्लभनन्दने   हुं नमन करूँ | नवनीतप्रभुना नवनीतने हुं  नमन करूं |

चलती    जै जै श्री विठ्ठलेश  जै जै श्री विठ्ठलेश जलेबीनो उत्सव  जै जै श्री विठ्ठलेश            
             जलेबी आरोगे श्रीजी    जै जै श्री विठ्ठलेश क्लेश ना रहे लेश जै जै श्री विठ्ठलेश  || २  ||

             वृन्दावनना चंदने हुं नमन करूँ | चरणाटधामने  हुं नमन करूँ |
             बसो बावनना नाथने हुं नमन करूँ | अष्ट सखाना स्थापकने हुं  नमन करूँ |
चलती    जै जै श्री विठ्ठलेश  जै जै श्री विठ्ठलेश जलेबीनो उत्सव जै जै श्री विठ्ठलेश            
             जलेबी आरोगे श्रीजी जै जै श्री विठ्ठलेश क्लेश ना रहे लेश जै जै श्री विठ्ठलेश  || ३  ||

             रामलीलाना नाथने हुं नमन करूँ | प्रेम स्वरूपने हु नमन करूँ |
             सेवा रीत प्रीत प्रभुने हुं नमन करूँ | व्रजना आनन्दकंदने हुं  नमन करूँ |
चलती    जै जै श्री विठ्ठलेश जै जै श्री विठ्ठलेश जलेबीनो उत्सव जै जै श्री विठ्ठलेश            
             जलेबी आरोगे श्रीजी जै जै श्री विठ्ठलेश क्लेश ना रहे लेश जै जै श्री विठ्ठलेश  || ४  ||               

यमुनाष्टपदी : नमो देवी यमुने

नमो  देवी  यमुने,  नमो देवी  यमुने,  हर कृष्ण  मिलनांतरायं  ।
निजनाथ  मार्ग,  दायिनी  कुमारी,  काम  पूरिके  कुरु,  भक्तिरायं  ।। ध्रु  ।।
मधुपकुलकलित,  कमलावली,  व्यपदेशधारित,  श्रीकृष्णयुत,  भक्त  हृदये  ।
सततमतिशयित,        हरिभावना,      जाततत्सारूप्य,    गदित       हृदये  ।। 1 ।।
निजकूलभवविविध,      तरुकुसुमयुत,      नीरशोभया,      विलसदलिवृन्दे  ।
स्मारयसि         गोपीवृन्द,         पूजितसरसमीशव,        पुरानंद       कंदे  ।। 2 ।।
उपरिवलदमल,     कमलारुण द्युतिरेणु,     परिमलितजल,      भरेणामुना  ।
व्रजयुवति    कुचकुंभ,    कुंकुमारुण मुर:,    स्मारयसि         मारपितुरधुना  ।। 3 ।।
अधिरजनिहरिविहितं, इक्षितंकुवलयानिध, सुभग  नयनानि, उशति  तनुषे  ।
नयनयुगमल्पमिति,       बहुतराणिचतानि,    रसिकतानिधि,    तयाकुरुषे  ।। 4 ।।
रजनिजागरजनितं,       रागरंजितनयन,        पंकजैरहनि,      हरिमीक्षसे  ।
मकरंदभरमिषेण,        आनंदपूरिता,       सततमिह,           हर्षाश्रु  मुंचसे  ।। 5 ।।
तटगतानेकशुक,     सारिकामुनिगण,     स्तुतविविधगुण,     सिन्धुसागरे  ।
संगतासततमिह,        भक्तजनताप हृति,     राजसेरास,     रस      सागरे  ।। 6 ।।
रतिभरश्रमजलोदित,      कमल परिमल,    व्रजयुवतिजन,     विहृति  मोदे  ।
ताटंकचलन,     सुनिरस्त,     संगीतयुत,      मदमुदितमधुप,   कृतविनोदे  ।। 7 ।।
निजव्रजजनावनायत्त,    गोवर्धने,     राधिकाहृदयगत,        कर    कमले  ।
रतिमतिशयतिरस,      विठ्ठलस्याशुकुरु,      वेणुनिनादआह्वान,       सरले  ।। 8 ।।
व्रजपति     परिव्रुढ,      वल्लभेकदात्वत,     चरणसरोरुह,    मीक्षणास्पंदमे  ।
तवतटगतवालुका:,         कदाहंसकल,        निर्जांगना:          मुदाकरिष्ये  ।। 9 ।।
वृन्दावने         चारू,         ब्रुहद्घने,      मन्मनोरथं,       पूरय,     सूरसूते |
द्रग्गोचर:    कृष्ण,        विहार अवस्थिति:,       त्वदीयेतटएव,     भूयात  ।। 10 ।।

Featured Post

શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:

શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:… શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:… શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: કદંબ કેરી ડાળો બોલે શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: જનુમા કેરી પ...