लन की मंडली मनोहर...

फूलन की   मंडली   मनोहर   बैठे  जहां  रसिक  पिय  प्यारी ।
फूलन के बागे और भूषण फूलन के फूलनही की पाग संवारी ।। १ ।।
ढिंग  फूली  वृषभाननंदिनी     तैसी  ये  फूल  रही  उजियारी ।
फूलन  के   झूमका   झरोखा   बहु  फूलन की   रची   अटारी ।। २ ।।
फूले सखा चकोर निहारत   बिच  चंद   मिल  किरण संवारी ।
चतुर्भुजदास   मुदित   सहचारी   फूले   लाल   गोवर्धनधारी ।। ३ ।।

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