श्री वल्लभ लाल पालने झूलें मात एलम्मा झुलावे हों

श्री वल्लभ लाल पालने झूलें मात एलम्मा झुलावे हों।
रतन जटित कंचन पलना पर झूमक मोती सुहावे हो॥१॥
झालर गज मोतिन की राजत दच्छिन चीर उढावे हो।
तोरन घुंघरु घमक रहे हैं झुंझना झमकि मिलावे हो॥२॥
चुचकारत चुटकी दै नचावत चुंबन दै हुलरावे हो।
किलकि किलकि हँसत मुख प्रमुदित बाललीला जाहि भावे हो॥३॥
कबहुँ उरज पय पान करावत फिर पलना पोढावे हो।
पीठ उठाय मैया सन्मुख व्है आपुन रीझि रिझावे हो॥४॥
महाभाग्य हैं तात मात दोऊ आपुन यों बिसरावै हो।
वल्लभदास आस सब पूजी श्री वल्लभ दरस दिखावे हो॥५॥

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