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यमुना जी के ४१ पद
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मंगला आरती
श्री महाप्रभु जी के पद
जे जन गंगा गंगा रटे |
जे जन गंगा गंगा रटे |
पातक कोटिक जनम जनम के, ततक्षन मांझ कटे || १ ||
मंजन किये होत तन निरमल, आवागमन मिटे |
'परमानंद' जल पान किये तें, बसे श्री जमुना तटे || २ ||
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