नौमी चैत की उजियारी

नौमी चैत की उजियारी।
दसरथ के गृह जनम लियौ है मुदित अयोध्या नारी॥१॥
राम लच्छमन भरत सत्रुहन भूतल प्रगटे चारी।
ललित विलास कमल दल लोचन मोचन दुःख सुख कारी॥२॥
मन्मथ मथन अमित छबि जलरुह नील बसन तन सारी।
पीत बसन दामिनी द्युति बिलसत दसन लसत सित भारी॥३॥
कठुला कंठ रत्न मनि बघना धनु भृकुटी गति न्यारी।
घुटुरुन चलत हरत मन सबको ‘तुलसीदास’ बलिहारी॥४॥

No comments:

Post a Comment

Featured Post

શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:

શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:… શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ:… શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: કદંબ કેરી ડાળો બોલે શ્રીકૃષ્ણ: શરણં મમ: જનુમા કેરી પ...